दोहे : नवरात्रि पर विशेष
-माणक तुलसीराम गौड़ विहंगम, अप्रैल-मई 2024, वर्ष-1 अंक-2 1 हॅंसते हॅंसते आज ही, माता आई द्वार। नवरात्रि शुभ पर्व है, माँ का हो सत्कार।। 2… Read More »दोहे : नवरात्रि पर विशेष
-माणक तुलसीराम गौड़ विहंगम, अप्रैल-मई 2024, वर्ष-1 अंक-2 1 हॅंसते हॅंसते आज ही, माता आई द्वार। नवरात्रि शुभ पर्व है, माँ का हो सत्कार।। 2… Read More »दोहे : नवरात्रि पर विशेष
अभय कुमार आनंद पूर्व सेना अधिकारी, साहित्यकार, लखनऊ विहंगम, अप्रैल-मई 2024, वर्ष-1 अंक-2 पीले-पीले पुष्प-पट,तन सरसों लिपट,लेता दिखे करवट, हँसता बसंत है।कली हँसे डाल-डाल,अलि करता… Read More »मनहरण घनाक्षरी
स्मृति सिंह, असि. प्रोफ़ेसर आर्य कन्या महाविद्यालय, हरदोई विहंगम, अप्रैल-मई 2024, वर्ष-1 अंक-2 ये जिंदगी भी बस, बस सी हो गई है। खड़खड़ाती, हिचकोले खाती,… Read More »ये जिंदगी भी बस